Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 37, Verses 57–58

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 37, verses 57–58 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 37 · श्लोक 57,58

संस्कृत श्लोक

मिथः सारस्वता नीत्वा आदिनान्तं कृताजयः । पण्डिता इव वादेषु नोद्विग्ना न पराजिताः ॥ ५७ ॥ खर्वगाः खदिताः क्षुद्रा यातुधानैः परावृताः । तेजः परममाजग्मुः शान्ताग्नय इवेन्धनैः ॥ ५८ ॥

हिन्दी अर्थ

सरस्वती नदी के तीरवर्ती देशों के योद्धा शामतक लगातार परस्पर युद्ध करते हुए शास्त्रार्थ में पण्डितों की नाई न तो श्रान्त हुए (थके) ओर न पराजित ही हुए । खर्वदेशवासी क्षुद्र योद्धा यद्यपि भाग कर चले गये थे तथापि लंका में रहनेवाले सहायभूत राक्षसां द्वारा परावतिर्त हुए, फिर तो वे जैसे बुझी हुई अग्नि लकड़ियों से भड़क उठती है वैसे ही परम प्रताप को प्राप्त हुए