Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 38, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 38, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
विनिर्गन्तुं प्रववृते रणादथ बलद्वयम् ।
वारिपूरश्चतुर्दिक्षु प्रलयैकार्णवादिव ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर जैसे
प्रलय के अन्त मेँ प्रलयकालीन एकमात्र समुद्र जलप्रवाह चारों दिशाओं में बहता है, वैसे ही
दोनों सेनाएँ रणभूमि से निकलने लगी