Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 39, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 39, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
अथ वीर इवारक्तः कालेनास्तमितो रविः ।
अस्त्रतेजःपरिम्लानप्रतापोऽब्धौ समुज्झितः ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवशिष्ठजी ने कहा : श्रीरामचन्द्रजी, तदुपरान्त अस्त्र-शस्त्रो के तेज से जिसका पराक्रम
मन्द पड़ गया हे, ऐसे रक्त से लथपथ वीर के समान स्वच्छ आकाश में मन्द प्रतापवाले
अस्तचलोन्मुख अतएव लाल सूर्य को काल ने समुद्र मेँ डवा दिया
सर्ग सन्दर्भ
अड़तीसवाँ सर्ग समाप्त उनतालीसवाँ सर्ग सूर्य के अस्तसमय का, राक्षस ओर वेतालो से परिपूर्ण सन्ध्या का ओर रात्रि में अत्यन्त बीभत्स रणभूमि का वर्णन ।