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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 39, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 39, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

निःसत्त्वेषु तमोन्धेषु रसनारसशालिषु । संकोचमाययुः पद्मामृतानां हृदयेष्विव ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे प्राणरहित, मोह से अन्धकारमय ओर जीवनावस्था में जीवन से प्रेम करनेवाले मृतकों के हृदयों में प्राणो द्वारा शब्दायमान कमल संकोच को प्राप्त होते हैं, वैसे ही हंस आदि जीव जिनसे हट गये हैं, अन्धकार से अन्धे बने हुए जलपूर्णं तालाबों में पहले भवर आदि के कारण शब्द कर रहे कमल संकोच को प्राप्त हो गये