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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 39, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 39, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

मीलत्पक्षाः क्षणात्सुप्ताः कृच्छ्रप्रोच्छ्रितकन्धराः । कुलायेषु खगा आसञ्छवाङ्गेष्विव हेतयः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

जिनके पंख देह से सटे थे ओर जो क्लेश से ऊपर को अपनी गर्दन किये थे, ऐसे पक्षीगण मृत योद्धाओं के शरीरों में आयुधो की नाई घोंसलों में क्षणभर में निद्रादेवी की गोद में पहुँच गये थे