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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 4, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 4, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

प्रतीहारः पुरः प्रह्वो भूत्वाह वसुधाधिपम् । देव स्नानद्विजार्चासु कालो व्यतिगतो भृशम् ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

इसी समय द्वारपाल सभा में आकर बड़े विनम्रभाव से महाराज दशरथ से बोला : देव स्नान, ब्राह्मण पूजा आदि का समय बहुत बीत चुका है