Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 4, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 4, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
अविद्या संसृतिश्चित्तं मनो बन्धो मलस्तमः ।
इति पर्यायनामानि दृश्यस्य विदुरुत्तमाः ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
अविद्या, संसार, चित्, मन, बन्धन, मल, तम-ये
सब दृश्य के पर्यायवाची शब्द हैं, ऐसा विद्वान् लोग कहते हैं