Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 4, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 4, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
आतिवाहिकदेहात्मा मन इत्यभिधीयते ।
आधिभौतिकबुद्धिं तु स आधत्ते चिरस्थितेः ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि सर्वपदार्थाकार मन ही ब्रह्मा की देह है, तो उसकी अन्य प्रष्टव्य वस्तु ही क्या रही,
इस शंका पर कहते हैं।
आतिवाहिक देहरूपी (संकल्पमय देहरूपी) ब्रह्मा लोकमें मन कहा गया है, वही सूक्ष्म
भूतों के ही मिश्रण से पंचीकरण द्वारा आधिभौतिक बुद्धिका (स्थूल देहज्ञान का) आधान
करता है, यही उसका कर्तृत्व है