Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 40, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
बोधोन्मुखत्वे हि महत्तत्प्रबुद्धं यदा भवेत् ।
तदा तन्मात्रदिक्कालक्रिया भूताद्युदेति खात् ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
वही व्योमात्मक प्रकृति जब प्रबुद्ध यानी
चित्प्रतिफलित होती है अर्थात् जब उसके अहंकार का उदय होता है तब तदवस्थ आकाश से
पाँच तन्मात्रा, दिशा, काल, भूत आदि सम्पूर्ण सूक्ष्म भाव उत्पन्न होते हैं