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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, Verse 45

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 40, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 45

संस्कृत श्लोक

यत्रैव म्रियते जन्तुः पश्यत्याशु तदेव सः । तत्रैव भुवनाभोगमिममित्थमिव स्थितम् ॥ ४५ ॥

हिन्दी अर्थ

जहाँ पर वह प्राणी मरता है, वहाँ उसी को शीघ्र देखता है, वहीं पर इस भुवनाभोग को इरी प्रकार से स्थित देखता हे