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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 40, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । आधिभौतिकदेहोऽहमिति यस्य मतिभ्रमः । तस्यासावणुरन्ध्रेण गन्तुं शक्नोति नानघ ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे अनघ, जिसको यह भ्रम रहता है कि यह शरीर आधिभौतिक है, उस पुरुष का यह शरीर सूक्ष्म छिद्र से नहीं जा सकता