Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 41, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 41, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । तयोः प्रविष्टयोर्देव्योः पद्मसद्म बभूव तत् । चन्द्रद्वयोदयोद्द्योतधवलोदरसुन्दरम् ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे रामचन्द्रजी, उन दो देवियों के प्रविष्ट होने पर राजा पद्म के घर के भीतरी भाग दो चन्द्रमाओं के उदय होने पर जैसा प्रकाश होता है, वैसे प्रकाश से वह सुन्दर हो गया

सर्ग सन्दर्भ

चालीसवाँ सर्ग समाप्त इकतालीसवों सर्म सोकर जागे हुए राजा द्वारा घर में प्रविष्ट हुई देवियों का पूजन तथा राजा के वंश का पूर्वजन्म की स्मृति का ओर ज्ञप्ति द्वारा आत्मोपदेश का वर्णन ।