Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 41, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 41, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
कोमलामलसौगन्ध्यमृदुमन्दारमारुतम् ।
तत्प्रभावेन निद्रालुनृपेतरनराङ्गनम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
उसमें स्पर्श होने पर बड़े भले लगनेवाले ओर निर्मल सुगन्धिवाले मृदु मन्दार
पवन बहने लगे । उन देवियों के प्रभाव से राजा के सिवा घर के अन्य नर नारी निद्रायुक्त हो
गये