Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 41, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 41, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
सौभाग्यनन्दनोद्यानं विद्रुतव्याधिवेदनम् ।
सवसन्तं वनमिव फुल्लं प्रातीरवाम्बुजम् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
वह सुन्दरता में नन्दन वन के तुल्य हो गया, व्याधि, पीडा उससे दूर हो गई, वसंत
के उल्लाससे युक्त वन की नाई ओर प्रातः काल के खिले हुए कमल की नाई रमणीक हो
गया