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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 41, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 41, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

तयोर्देहप्रभापूरैः शशिनिस्यन्दशीतलैः । आह्लादितोऽसौ बुबुधे राजोक्षित इवामृतैः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

चन्द्रमा के द्रव के समान शीतल उनकी देह के कान्ति पटल से, अमृत से सिक्त हुए की नाई, आद्लादित होकर वह राजा जाग उठा