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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 41, Verses 11–12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 41, verses 11–12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 11,12

संस्कृत श्लोक

लीलायै भूपजन्माथ वक्तुं मन्त्रिणमीश्वरी । बोधयामास पार्श्वस्थं संकल्पेन सरस्वती ॥ ११ ॥ प्रबुद्धोप्सरसौ दृष्ट्वा प्रणम्य कुसुमाञ्जलिम् । तयोः पादेषु संत्यज्य विवेश पुरतो नतः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

देवी सरस्वती ने, लीला के प्रति राजा का जन्मवृत्तान्त कहने के लिए, संकल्प से पास में स्थित मन्त्री को जगाया। जागे हुए मन्त्री ने अप्सराओं के सदृश मनोहररूपवाली दो देवियों को देखर उन्हे प्रणाम किया और उनके चरणों में पुष्पांजलि अर्पित कर बड़े विनय से उनके आगे उपस्थित हुआ