Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 41, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 41, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 41 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
जयतां जन्मदोस्थित्यदाहदोषशशिप्रभे ।
देव्यौ बाह्यान्तरतमोविद्रावणरविप्रभे ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे देवियों, आपकी जय हो, आप दोनों
जन्म, दुःखमयजाल ओर त्रिविध तापरूपी दाह-दोष को दूर करने के लिए चन्द्रकान्ति (चाँदनी )
हैँ, बाह्य ओर आभ्यन्तर अन्धकार के विनाश करने के लिए सूर्य के प्रकाशरूप हैं