Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 43, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 43, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
आवर्तननदीदीर्घा वहत्यूर्ध्वतरङ्गिणी ।
पश्येयं धूमयमुना व्योमगङ्गां प्रधावति ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
देखो, आवर्तो से और नदी के प्रवाहभेदों से विशाल, ऊपर को बहनेवाली
धुम्ररूपी यमुना आकाशगंगा से मिलने के लिए दोडी जा रही है