Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 43, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 43, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
वहदुल्मुककाष्ठोर्ध्वगामिनी धूमनिम्नगा ।
वैमानिकानन्धयति पश्याग्निकणबुद्बुदा ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
देखो, यह ऊपर
को जानेवाली धुम्रनदी, जिसमें अधजले काठ जल रहे हैं और चिनगारियाँ ही बुद्बुदों की
तरह प्रतीत हो रही हैं, विमानों से यात्रा करनेवाले देवता, गन्धर्व आदि को अन्धा बना रही
है