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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 43, Verse 34

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 43, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

अस्या माता पिता भ्राता जामाता स्तनपाः सुते । अस्मिन्सद्मनि निर्दग्धा दग्धैवासत्समिन्धने ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

हे पुत्री, इस बेचारी के माता, पिता, भाई, जमाई और दूध पीने वाले बच्चे इस घर में जल गये हैं । इसे भी अग्नि के न रहने पर भी उनके विरहरूपी अग्नि में जली हुई ही समझो