Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 43, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 43, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
गवाश्वमहिषेभोष्ट्रश्वशृगालेडकैरहो ।
घोरै रणमिवारब्धं मार्गरोधकमाकुलैः ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
हाय हाय, व्याकुल हुए भीषण गाय, घोड़े भैंस,
हाथी, ऊट, कुत्ते, सियार और भेडो ने मार्ग को रोकनेवाला युद्ध सा आरम्भ कर दिया है,
जरा देखिये तो सही