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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 43, Verse 45

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 43, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 45

संस्कृत श्लोक

पटैः पटपटाशब्दजलजालालिमालितैः । आक्रन्दन्त्यः स्त्रियो यान्ति स्थलपद्माचिता इव ॥ ४५ ॥

हिन्दी अर्थ

आग की ज्वालाओं से झुलस जाने के भय से गीले वस्त्र पहनकर घरों से निकल रही स्त्रियों का वर्णन करते है । जलविन्दुसमूहरूपी भ्रमरो से परिवेष्टित अतएव पटपट शब्द करनेवाले वस्त्रौ से युक्त ओर हाथ, पैर ओर मुंह रूपी स्थलकमलों से बनी हुई सी स्त्रयो रोती हुईं जाती हैं