Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 44, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 44, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
इत्युक्त्वा निर्ययौ राजा कोपारुणितलोचनः ।
मत्तेभनिर्भिन्नवनः कन्दरादिव केसरी ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसा कह
कर राजा, जिसकी आँखें शत्रुओं के अत्याचार से लाल हो गई थी, जैसे मत्त हाथियों ने
जिसका वन छिन्न भिन्न कर दिया हो ऐसा सिंह गुहा से निकले वैसे घर से निकला