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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 44, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 44, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

अथ तस्या वयस्यैका राजानं तं व्यजिज्ञपत् । भूतसंग्रामसंरब्धममरेन्द्रमिवाप्सराः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

राजमहल में प्रविष्ट होने के अनन्तर जैसे अप्सरा भूतसंग्राम में संलग्न देवराज से निवेदन करे, वैसे ही उसकी एक सखी ने राजा से निवेदन किया