Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 45, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 45, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
तेन तेन प्रकारेण त्वं मया संप्रबोधिता ।
तया युक्त्यामलं भावं नीतासि वरवर्णिनि ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्रे, पूर्वोक्तिभिन्न प्रकार से मेरे द्वारा प्रबोधित
हुई तुम उक्त युक्ति से बोध द्वारा जिसका अज्ञानरूपी आवरण निकल गया हे ऐसे निर्मल
आत्मावस्थितिरूप भाव को प्राप्त की गई हो