Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 45, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 45, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
स्वसंविद्यतनादन्यन्न किंचिच्च कदाचन ।
फलं ददाति तेनाशु यथेच्छसि तथा कुरु ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
स्वसंवित् (जीवशक्ति) प्रयत्न के विना
कभी कुछ भी फल नहीं दे सकती, इसलिए तुम जैसा फल चाहती हो वैसा कर्म करो, कर्मानुसार
ही फल मिल सकता हे