Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 45, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 45, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
श्रीदेव्युवाच ।
एवमस्तु त्वयाऽविघ्नं पूजितास्मि सुते चिरम् ।
अनन्यभावया भूरि पुष्पधूपसपर्यया ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीदेवीजी ने कहा : हे पुत्री, तुमने चिरकालतक
अनन्यभक्त से प्रचुर पुष्प-धूप-दीप-युक्त पूजन -सामग्री से मेरा सांगोपांग पूजन किया है,
अतः जैसा तुम चाहती हो, वैसा ही होगा