Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 46, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 46, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
अथोदपतदुद्दामनागाभ्ररवनिर्भरः ।
शैलभित्तिप्रतिध्वानदारुणो दुन्दुभिध्वनिः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
तदुपरान्त मदोन्मत्त हाथी रूपी मेघों के
चिंघाड़ से बढ़ा चढ़ा हुआ और पर्वतों के शिखरोंमें गूँजने से कठोर नगाड़ों का शब्द होने
लगा