Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 47, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 47, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
भुवनं कज्जलाम्भोधेरिवोत्क्षिप्तमराजत ।
पेतुः कनकनिःस्यन्दसुन्दरा रविरश्मयः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
रणभूमि मेँ श्रष्ठवीरों पर रुधिर छटा की नाई शैलों पर सुवर्ण
के द्रव समान सूर्य किरणें गिरी