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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 47, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 47, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

प्रेरयत्याशु तत्तस्य तदा संपादयाम्यहम् । यो यथा प्रेरयति मां तस्य तिष्ठामि तत्फला ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

उक्त अर्थ को ही स्पष्ट करती हैं। जो मुझे जैसे प्रेरित करता है, उसके लिए में तत्फलस्वरूप होकर स्थित होती हूँ। मेरा यह स्वभाव अग्नि की उष्णता के समान अन्यथा नहीं होता