Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 48, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
प्राप्य राजा पुरः प्राप्तं सिन्धुमुद्धुरकन्धरम् ।
मध्याह्नतपनान्तेन कोपेन विततोऽभवत् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा सिन्धु को पाकर मध्याहकालीन सूर्य के तुल्य कोप से व्याप्त हुआ