Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 48, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
धनुरास्फालयामास चिरारावितदिङ्मुखम् ।
कल्पान्तपवनास्फोट इव मेरुगिरेस्तटम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
जसे प्रलयकालीन
वायु का आघात सुमेरु के तन को टंकार से युक्त करता हे, वेसे ही राजा ने अपने धनुष को,
जिसने चिरकाल से दिकृमण्डल को मुखरित कर रक्खा था, टंकार से युक्त किया यानी
ताना