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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 48, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

विससर्जोर्जितो राजा प्रलयार्कः करानिव । तूणीररजनीबद्धाः शिलीमुखपरम्पराः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे प्रलयकालीन सूर्य अपनी किरणों को छोडता है, वैसे ही रोष के आवेग से प्रवृत्त राजा ने तरकसरूपी रात्रि में वधे हुए बाणो की परम्परा को छोड़ा