Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 48, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
कचत्कनकनाराचशरवर्षा अनारतम् ।
वहच्छवशवाशब्द निर्ययुर्धनुरम्बुदात् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
धनुषरूपी मेघ से चमक रहे सोने के फाल (अग्रभाग) वाले बाणो की वृष्टि “शव“- “शव” शब्द
करती हुई निरन्तर निकलती थी