Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 48, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
तं छित्त्वा सायकासारं शरीराम्बुधरं घनम् ।
व्योम्नि प्रसारयामास रसाच्छवशतान्वितम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा सिन्धु ने बाणों की उस वेगवती
वृष्टि को तहस-नहस कर रण में अतिशय अनुराग होने से शरीर (शवशरीर) रूपी जल को
धारण करनेवाले सैकड़ों शवोंसे युक्त मेघ को आकाश में फैलाया