Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 48, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
विदूरथस्तमप्याशु व्यधमत्सायकोत्तमैः ।
सामान्यजलदं मत्तं कल्पान्तपवनो यथा ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे प्रलयकालीन
मत्त पवन साधारण मेघ को उड़ा देता है वैसे ही राजा विदूरथ ने भी उसे अपने उत्तम-उत्तम
बाणो से तुरन्त उड़ा दिया