Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 68
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 48, verse 68 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 68
संस्कृत श्लोक
एवंविधानस्त्रमोहान्विदधुर्धावनेतरे ।
मिथोमायामयानग्रे पश्यन्त्यनुभवन्ति च ॥ ६८ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्व अस्त्र द्वारा की गई अपनी मलिनता को हटानेवाले तथा उनसे विरुद्ध
अस्त्रवेत्ताओं ने परस्पर ऐसे मायिक अस्त्रमोह किये, जिन्हें वे अपने सामने स्वयं देखते थे ओर
शत्रु के विनाशरूप फल द्वारा उनका अनुभव भी करते थे