Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 80
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 48, verse 80 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 80
संस्कृत श्लोक
जुघूर्णुर्गर्जनोच्छूनप्रतिश्रुद्धनकन्दराः ।
दिशश्चलितमातङ्गसिंहर्क्षरवघर्घराः ॥ ८० ॥
हिन्दी अर्थ
दिशाएँ,
जिनकी कन्दराएँ मेघों के गर्जन की बढ़ी चढी प्रतिध्वनियो से व्याप्त थी ओर जिनमें मेघगर्जन
सुनने के पश्चात् “हमारे सामने यह कोन गरज रहा है, यों क्रोधपूर्वक सामने दौड हुए हाथियों,
सिंहो ओर रीछों के प्रतिगर्जन से विपुल कोलाहल हो रहा था, घूमने लगी