Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verse 81
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 48, verse 81 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 81
संस्कृत श्लोक
महामुसलधाराभिः पेतुरासारवृष्टयः ।
कष्टटंकारकठिनाः कृतान्तस्येव दृष्टयः ॥ ८१ ॥
हिन्दी अर्थ
ओले गिरने
की कष्टदायक टं टं ध्वनियां से कठिन खूब वेगवाली वृष्टि बड़ी-बड़ी मूसलाधारों से गिरने
लगी । वह वृष्टि क्या थी मर्मस्थान और नसों को तोडने का ध्वनियोँसे कठिन (क्रूर) यम की
ही दृष्टि थी