Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 49, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 49, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठं उवाच ।
ववुर्वलितनीहारा विकीर्णवनपल्लवाः ।
वायवो धूतवृक्षौघाः सल्लीलापीडपांसवः ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, तुषार से सने हुए वायु बहने लगे, उन्होनें वन
के पल्लवों को अस्त-व्यस्त कर दिया, वन के वृक्षों को कपा दिया और जितने मूर्तिमान्
पदार्थ थे, उनके मस्तकों में धूलि को लीला से आपीड (शिरोभूषण) बना दिया
सर्ग सन्दर्भ
अड़तालीसवाँ सर्ग समाप्त उनचासवांँ सर्ग पर्वतास्त्र, वज़ास्त्र, ब्रह्मास्त्र ओर पिशाचास्त्र का, जिसमें पिशाचों की विविध लीलाएँ थी, विस्तार से वर्णन।