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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 49, Verses 35–36

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 49, verses 35–36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

वेतालास्त्रं ततो दत्ते तेनोत्तस्थुः शवव्रजाः । अमूर्धानः समूर्धानो वेताला वेशवल्लिताः ॥ ३५ ॥ ततः पिशाचवेतालरूपिकोग्रकबन्धवत् । तद्बभूव बलं भीममुर्वीनिगरणक्षमम् ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

तदुपरान्त पिशाचास्त्र से उत्पन्न पिशाच और रूपिकाओं की सेना की सहायता के लिए राजा सिन्धु ने वैतालास्त्र का प्रयोग किया, उससे वेतालों के आवेश से चलाये गये मुर्दों के झुण्ड के झुण्ड, जिनमें कुछ तो सिर रहित थे और कुछ सिर सहित थे, उत्पन्न हुए