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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 49, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 49, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

शेमुः सूत्त्कारडान्कारभांकारोत्कारका दिशाम् । प्रलापा इव विध्वस्ताः पूर्ग्रामवनवीरुधाम् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

दिशाओं के सूत्कार (निःश्वास के शब्द), डात्कार (लूटपाट के शब्द), भांकार (भीषण शब्द) और उत्कार शब्द शान्त हुए, नगर, गाँव, वन और लताओं के निरर्थक वर्णनवचन विध्वस्त होते हैं ॥