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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 49, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 49, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

अन्तरिक्षगता वृक्षपङ्क्तयः पतिता भुवि । नानाजनशवव्यूहे काकानामिव कोटयः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे अनेक लोगों के शवों के ढेर में करोड़ों कौए गिरते हैं, वैसे की पहले वायु के कारण आकाश में गई हुई वृक्षपंक्तियाँ पृथिवी में गिरी