Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 49, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 49, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
तेन शैलास्त्रघातेन विराट् प्राणसमीरणः ।
शमं चैतन्यशान्त्येव प्रययौ वायुराततः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
उस पर्वतास्त्र के प्रहार से
सर्वत्र व्याप्त वायु ऐसे शान्ति को प्राप्त हुआ जैसे कि तत्त्वज्ञान होने से, मायारूप कारण का
नाश होने के कारण, उसके कार्य विराट् सूत्रात्मा शान्त हो जाता है