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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 49, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 49, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

विदूरथोऽथ तत्याज पार्वतास्त्रं महास्त्रवित् । व्योमापि घनतोयेन समादातुमिवोद्यतम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

तदुपरान्त महास्त्रवेत्ता राजा विदूरथ ने पर्वतास्त्र का त्याग किया, वह मानों मेघ-जल के साथ आकाश को भी ग्रसने के लिए उद्यत था