Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 50, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 50, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
खङ्गावकृत्तगलगर्तगलत्सवातरक्तच्छटाछुरितवस्त्रतनुत्रगात्रम् ।
तत्याज तं भगवतीमभितो गृहान्तः सूतः प्रवेश्य मृतितल्पतले गतोऽरिः ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
सारथि ने राजा विदूरथ को, जिसके वस्त्र, कवच और शरीर तलवार से काटे गये गले
के छेद से बुद्बुद ध्वनि के साथ निकल रही रक्तधाराओं से सने थे, घर में ले जाकर सरस्वती
के सामने सुखपूर्वक मरण के योग्य कोमल बिस्तर में रखा और शत्रु भी घर में प्रवेश न कर
सकने के कारण लौट गया