Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 53, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 53, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
एतस्मिन्नन्तरे सा च न ददर्श कुमारिकाम् ।
मायामिव परिज्ञाता क्वापि यातां वरानना ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
इतने में ही सुन्दरी लीला ने कुमारी को नहीं देखा, जैसे ज्ञान होने पर
माया कहीं चली जाती है, वैसे ही वह कहीं चली गई