Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 54, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीदेव्युवाच । तस्माद्ये वेद्यवेत्तारो ये वा धर्मं परं श्रिताः । आतिवाहिकलोकांस्ते प्राप्नुवन्तीह नेतरे ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीदेवीजी ने कहा : भद्रे, इसलिए जो लोग तत्त्वज्ञानी हैं अथवा जिन लोगों ने योग के अभ्यास से जन्य परम धर्म का आश्रय लिया है, वे ही आतिवाहिक लोकों को प्राप्त होते हैं, अन्य लोग नहीं

सर्ग सन्दर्भ

तिरपनवाँ सर्ग समाप्त चौवनवाँ सर्ग सब पदार्थो की नियति, मरणक्रम, भोग और कर्म, गुण एवं आचार के अनुसार आयु के मान का वर्णन ।