Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 54, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
तेजःकणोऽसौ स्थूलत्वमात्मनात्मनि विन्दति ।
असत्यमेव सत्याभं ब्रह्माण्डं तदिदं स्मृतम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
वह तेज का कणरूप ब्रह्म अपने से अपने में स्थूलता को
प्राप्त करता हे यानी अपनी कल्पना से स्थूलता का लाभ करता हे, वही स्थूल यह दुश्यमात्र
ब्रह्म कहा गया है, जो असत्य होता हुआ भी सत्य-सा प्रतीत होता है