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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 54, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

सर्गादौ या यथा रूढा संवित्कचनसंततिः । साद्याप्यचलितान्येन स्थिता नियतिरुच्यते ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

नियति शब्द के अवयवार्थपर ध्यानपूर्वक विचार करने से भी यही अर्थ सिद्ध होता है, ऐसा कहती है। सृष्टि के आरम्भ में जो चेतनविकासपरम्परा जैसे आविर्भूत हुई (बद्धमूल हुई) उसे आज तक भी कोई दूसरा टससे-मस नहीं कर सका, अतएव वह नियति कही जाती है